जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हालात पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया बयान से ये साफ हो गया है कि इस वक्त ये एक अहम मुद्दा है.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य बनाने की मांग की.
सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और उनके सहयोगी न्यायाधीशों ने इस मामले में उच्च न्यायिक परिषद को जिम्मेदारी सौंपी है कि वह इस मुद्दे की संभावनाओं को देखें और सही निर्णय लेने का प्रयास करें।
इसके लिए वे अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से अपनी बात रखेंगे ।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यही है कि जम्मू-कश्मीर जनता की दिशा में सही फैसला लिया जाए. क्षेत्र की खासियत को ध्यान में रखते हुए उनके हित की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से केंद्र सरकार को भी इस मुद्दे से जुड़ने और सही फैसला लेने का निर्णय लेने का मौका मिलेगा।
सरकार को सुप्रीम कोर्ट के सुझावों पर अमल कर उनके हित में कदम उठाने का संकेत मिलेगा।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर की जनता का भविष्य उनके हाथ में है।
उन्हें अपने नागरिक अधिकारों का उपयोग करके एक मजबूत और प्रगतिशील राज्य की ओर एकजुट होने का मौका मिल रहा है।
जम्मू-कश्मीर की तरह अन्य राज्यों में भी ऐसे ही मुद्दों पर सोचने की जरूरत है ताकि हम सब मिलकर एक मजबूत और सक्षम भारत की ओर आगे बढ़ सकें।

