ChinaSpacePetrolPump : स्पेस में पेट्रोल पंप खोलने जा रहा है चीन :- ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने और अंतरिक्ष की रेस में सबसे आगे निकलने के लिए चीन एक बेहद चौंकाने वाले मिशन पर काम कर रहा है. ड्रैगन अब अंतरिक्ष में अपना पेट्रोल पंप बनाने जा रहा है, जिससे धरती की कक्षा में चक्कर काट रहे सैटेलाइट्स में दोबारा ईंधन भरा जा सके. चीन की डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन लेबोरेटरी और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइसेंज के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक बड़ी कामयाबी का खुलासा किया है, जिसने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में खलबली मचा दी है. अगर चीन का यह दावा पूरी तरह सच साबित होता है, तो वह अंतरिक्ष में सैटेलाइट रीफ्यूलिंग की तकनीक हासिल करने वाला दुनिया का अग्रणी देश बन जाएगा, जो भविष्य के अंतरिक्ष युद्ध और अभियानों की दिशा बदल सकता है।
अंतरिक्ष में कैसे मुमकिन होगा यह पेट्रोल पंप ?
जब भी कोई सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा जाता है, तो उसकी एक तय उम्र होती है. भले ही उसके सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कैमरे बिल्कुल ठीक काम कर रहे हों, लेकिन जैसे ही उसका ईंधन खत्म होता है, वह सैटेलाइट बेकार होकर अंतरिक्ष के कचरे में बदल जाती है. चीन ने इसी समस्या का तोड़ निकाला है।
चीन के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में एक टैंकर सैटेलाइट तैयार किया है, जो बिल्कुल किसी चलते-फिरते पेट्रोल पंप की तरह काम करता है. यह टैंकर सैटेलाइट अंतरिक्ष में तैरते हुए दूसरे जरूरतमंद सैटेलाइट के पास पहुंचता है, उसके फ्यूल पोर्ट को ट्रैक करता है और बेहद जटिल प्रक्रिया के जरिए उसमें ईंधन ट्रांसफर कर देता है।
142 किलो ईंधन और 8 साल की एक्स्ट्रा जिंदगी
चीनी शोधकर्ताओं के मुताबिक, चीन ने इस तकनीक का एक बेहद गोपनीय और सफल परीक्षण किया है. अंतरिक्ष में चक्कर काट रहे चीन के सर्विसिंग सैटेलाइट शिजियान-25 ने हाई-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद अपने नेविगेशन सैटेलाइट बेइदो-2 जी7 के साथ सफलतापूर्वक डॉकिंग की.इसके बाद शिजियान-25 ने बेइदो सैटेलाइट में लगभग 142 किलोग्राम सामान्य तापमान वाला ईंधन ट्रांसफर कर दिया. वैज्ञानिकों का दावा है कि इस रीफ्यूलिंग के कारण दम तोड़ रहे बेइदो सैटेलाइट का जीवनकाल करीब 8 साल और बढ़ गया।
ऑक्टोपस जैसी रोबोटिक आर्म का कमाल
अंतरिक्ष में हजारों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रहे दो सैटेलाइट्स को आपस में जोड़ना और ईंधन डालना बेहद मुश्किल भरा काम होता है. इसके लिए चीन ने अपने युक्सिंग-3 06 जैसे कमर्शियल सैटेलाइट्स में एक बेहद लचीली रोबोटिक आर्म फिट की है. यह रोबोटिक आर्म किसी ऑक्टोपस के हाथ की तरह मुड़ सकती है और घूम सकती है.यह आर्म खुद ब खुद टारगेट सैटेलाइट के नोजल को पकड़ती है और बिना एक बूंद लीक किए फ्यूल ट्रांसफर कर देती है. इसे नियंत्रित करने के लिए ऑटोमैटिक मोड के साथ-साथ धरती पर बैठे ऑपरेटर्स के लिए लाइव कैमरा गाइडेंस सिस्टम भी बनाया गया है।

