Kakbhushundi : कौन थे श्रीराम के भक्त ‘काकभुशुंडि’ ? :- अयोध्या राम मंदिर दान में हुए कथित घोटाले को लेकर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। बहुत से लोग दान की गई चीजों की रसीद न दिए जाने की शिकायत लेकर सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें एक महिला ने दावा किया है कि उन्होंने मंदिर के ट्रस्टी चंपत राय को चांदी से बनी काकभुशुण्डि की प्रतिमा दान की थी। उन्हें आज तक इस दान की कोई रसीद नहीं दी गई। आगे जानिए क्या है पूरा मामला और कौन थे काकभुशुंडी?
अनिता भारद्वाज नाम की एक महिला ने दावा किया है कि उन्होंने चांदी से बनी काकभुशुण्डि की प्रतिमा मंदिर के ट्रस्ट्री चंपत राय को दान में दी थी और इसे राम दरबार में स्थापित करने का आग्रह किया था। तब चंपत राय ने इस दान की रसीद बाद में देने का कहा था। बाद में अनिता में पत्र लिखकर चंपत राय से दान की रसीद मांगी जो उन्हें अभी तक नहीं मिली और न ही काकभुशुण्डि की प्रतिमा के बारे में जानकारी दी।
धर्म ग्रंथों में काकभुशुंडी को भगवान श्रीराम के महान भक्तों में से एक बताया गया है। इनके बारे में रामचरितमानस के उत्तरकांड में विस्तृत वर्णन मिलता है। जिसमें लिखा है वे एक अमर ऋषि थे, जिन्होंने कौए (काक) का रूप धारण किया था, इसी कारण उनका नाम काकभुशुंडी पड़ा। काकभुशुंडी परम ज्ञानी थे, उन्हें अनेक कल्पों तथा युगों का ज्ञान प्राप्त था। उन्होंने ही भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ को श्रीराम की महिमा और रामकथा सुनाई थी।

