RamMandirNews : राम मंदिर में 105 बार चढ़ावा चोरी, CCTV में कैद सबूत :- राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में सोमवार (सितंबर, 21, 2026) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान कई अहम जानकारी सामने आई. SIT ने अदालत को बताया कि मंदिर परिसर में चोरी के 105 मामले CCTV में कैद हुए हैं. SIT ने जांच से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट भी शीर्ष अदालत के सामने रखी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने SIT रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि जांच अब अंतिम चरण में है और 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाए।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने SIT की स्टेटस रिपोर्ट भी देखी. रिपोर्ट में अब तक हुई गिरफ्तारियों, जुटाए गए साक्ष्यों और जांच की प्रक्रिया का विवरण दिया गया है. अदालत को बताया गया कि CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण कर कथित तौर पर चोरी की घटनाओं और उनमें शामिल लोगों की पहचान की गई. SIT रिपोर्ट के मुताबिक, CCTV फुटेज की जांच में दान चोरी की 105 घटनाएं दर्ज हुई हैं. रिपोर्ट में मंदिर में मूल्यवान वस्तुओं से जुड़े रिकॉर्ड और उनके रखरखाव की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है. बताया गया है कि मूल्यवान वस्तुओं की रसीदें सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार की जाती हैं और इन वस्तुओं को SBI के लॉकर में रखा जाता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से SIT की रिपोर्ट की कॉपी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग स्वीकार नहीं की. मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि वह मामले को सेशन जज के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं करना चाहती. पीठ ने यह भी कहा कि अगर उसे आगे की जांच की जरूरत लगी तो वह इस संबंध में उचित आदेश पारित करेगी. फिलहाल अदालत ने जांच की प्रगति और SIT की रिपोर्ट में सामने आई जानकारियों को रिकॉर्ड पर लिया है।
इस मामले में दर्ज FIR में आठ लोगों के नाम शामिल हैं. इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं. इनके अलावा कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दान चोरी के मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था. यह SIT लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में बनाई गई थी. इसका गठन राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर किया गया था. SIT ने 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी, जिसमें कई कड़े सुझाव दिए गए थे. मामला सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा को उनके पदों से हटाया गया. इसके बाद ट्रस्ट में CEO के नेतृत्व वाली प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई. पूर्व सैन्य अधिकारी जितेंद्र मिश्रा को CEO नियुक्त किया गया है. उन्होंने व्यवस्था में बदलाव और भविष्य में संचालन को अधिक बेहतर बनाने की बात कही है।

