TehriDevelopmentAuthority : नक्शा फर्जीवाड़े में सहायक अभियंता पंकज पाठक पर बड़ा एक्शन, मिली विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि :- एक नक्शा बदला, दूसरा अपलोड हुआ और अब मामला पहुंच गया है अधिकारी की सेवा पुस्तिका तक।” टिहरी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण में मानचित्र स्वीकृति से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में सहायक अभियंता पंकज पाठक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह ने उन्हें विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि जारी की है। आदेश में बिना सक्षम अनुमति स्वीकृत मानचित्र में बदलाव, परिवर्तित/कूटरचित अभिलेख तैयार करने, अधिकारिता का उल्लंघन और अनधिकृत निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं।
मामला मानचित्र संख्या MAP/TSN/NE/AA/0002/25-26 से जुड़ा है। दस्तावेज के अनुसार आवेदन 31 दिसंबर 2025 को प्रस्तुत हुआ और तकनीकी जांच के बाद उपाध्यक्ष ने 6 अप्रैल 2026 को मानचित्र स्वीकृत किया। लेकिन पत्रावली में 29/30 जून 2026 को पंकज पाठक की ओर से एक अलग संशोधित मानचित्र अपलोड किया गया। प्राधिकरण के अनुसार इसके लिए सक्षम स्तर से पूर्व अनुमति या अलग अनुमोदन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
मामला तब और गंभीर हो गया जब 6 अप्रैल को स्वीकृत मानचित्र 15 जुलाई 2026 को जारी किया गया, जबकि उससे पहले ही जून में दूसरा मानचित्र अपलोड हो चुका था।
जांच में स्वीकृत मानचित्र में स्टिल्ट पार्किंग और बेसमेंट से जुड़े कुछ प्रावधानों को भवन उपविधि, 2011 (संशोधित-2024) के अनुरूप प्रथमदृष्टया नहीं पाया गया।
पंकज पाठक को 16 सितंबर को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। उन्होंने 21 सितंबर को जवाब दिया, लेकिन प्राधिकरण ने उसे संतोषजनक नहीं माना। आदेश के अनुसार उनके जवाब में आरोपों का तथ्यात्मक और विधिसम्मत उत्तर देने के बजाय दूसरे मानचित्र को जबरन स्वीकृत किए जाने और भ्रष्टाचार जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया।
सरकारी जमीन पर कब्जे का मुद्दा भी सामने आया। प्राधिकरण ने सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे और अनधिकृत निर्माणों को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा था।
आदेश में कहा गया कि कई स्थानों पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और बिना अनुमति निर्माण की शिकायतें सामने आईं, जिससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और कानूनी व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई को लेकर भी प्राधिकरण ने सवाल उठाए। आदेश में कहा गया कि नोटिस जारी होने के बावजूद निगरानी, स्थलीय निरीक्षण, रोकथाम और समयबद्ध सीलिंग या ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई प्रभावी रूप से नहीं हुई और कई निर्माण आगे बढ़ गए।
आदेश में सुप्रीम कोर्ट के लोगनाथ बनाम तमिलनाडु राज्य एवं अन्य मामले में 20 मई 2026 के आदेश का भी हवाला दिया गया है। प्राधिकरण ने माना कि पंकज पाठक ने अपने दायित्वों के निर्वहन में अपेक्षित सावधानी और प्रशासनिक अनुशासन का पालन नहीं किया।
साथ ही आदेश में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, नियमों की अनदेखी और मीडिया व सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक तथ्य प्रसारित कर जांच को प्रभावित करने जैसे आरोप भी दर्ज हैं। हालांकि, ये प्राधिकरण के आदेश में दर्ज आरोप और निष्कर्ष हैं, इन्हें किसी न्यायिक निर्णय में सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
अब इस पूरे मामले का सबसे बड़ा प्रशासनिक असर यह है कि पंकज पाठक के खिलाफ जारी विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि उनकी सेवा पुस्तिका में अलग से दर्ज की जाएगी।
“मानचित्र से शुरू हुआ विवाद अब सेवा अभिलेख तक पहुंच चुका है—आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।”

