उत्तराखंड सरकार जिले में खाली पड़े महत्वपूर्ण पदों को नही भर पायी है. जिले में प्रधानाचार्य, , प्रवक्ता, खण्ड शिक्षा अधिकारी सहित तमाम अधिकारियों का टोटा है।
इसके बावजूद भी इन पदों को भरने के लिए लम्बे समय से कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है , और जिसका सीधा असर कहीं न कहीं पिथौरागढ़ के सरकारी स्कूलों के छात्रों पर पड़ रहा है।
जनपद पिथौरागढ़ में पिछले कई सालों से शिक्षा विभाग में तमाम पद खाली पड़े हैं, जिन्हें भरने में सरकार गंभीर नहीं दिखाई देती है।
सीमांत जिले में प्रधानाचार्य के 128 पदों में से 105 पद खाली हैं. प्रधानाध्यापक के 87 पदों में से 77 रिक्त हैं. जिले में आठ विकासखंड में सिर्फ एक खण्ड शिक्षा अधिकारी और उप शिक्षा अधिकारी तैनात हैं।
पिथौरागढ़ में शिक्षकों के लगभग 1200 पद खाली.
पिथौरागढ़ में अगर प्रवक्ता पद की बात करें तो 1069 में से 570 पद खाली हैं. यही हाल सहायक अध्यापक के पदों की संख्या का है, जहाँ 1493 पदों के सापेक्ष 437 पद खाली पड़े हैं।
पिथौरागढ़ में इतनी भारी संख्या में शिक्षकों और अधिकारियों का टोटा जनपद पिथौरागढ़ में है, जहां पर गेस्ट टीचरों की मदद से विद्यालयों में पढ़ाई चल रही है।
पिथौरागढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता पर उठ रहा है सवाल?
जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी जेएस जुकरिया ने समय-समय पर शासन को इस समस्या से अवगत कराने की बात कही थी और उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, लेकिन गौरतलब है कि पिथौरागढ़ में शिक्षा विभाग भी सिस्टम के सामने लाचारनजर आ रहा है।
शिक्षा विभाग को अधिकारियों की कमी के चलते जिले की शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, और शिक्षकों की भारी कमी के चलते जिले में सरकारी स्कूलों में पड़ने वाले बच्चों की शिक्षा में गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहें है, जिसका की सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है?

