PositiveMindSet : PositiveMindSet : दिमाग में रोज आते हैं 6,000 विचार :- इन दिनों दुनिया सब पहले से ज्यादा तनाव से गुजर रही हैं। पहले कोरोना वायरस, फिर रूस-यूक्रेन युद्ध और अब खाड़ी देशों में भयंकर युद्ध से हमारे आपके जीवन पर पड़ता असर …. इन सके बीच रोजमर्रा के बढ़ते खर्च और घरेलू चुनौतियों से सामना। हम भविष्य की योजना बनाते हैं, लेकिन रोजमर्रा के नकारात्मक विचारों से इन पर खासा असर पड़ता है। हमारे जीवन का तनाव इतने रूप बदल रहा है कि सकारात्मक साेच पाना अब आसान नहीं रहा है ।
इसी पर है हमारी ये खबर, बीते कुछ समय पहले हुआ कनाडा की क्वींस यूनिवर्सिटी का शोध बताता है कि हर दिन दिमाग में 6,000 विचार आते हैं। वहीं नेशनल साइंस फाउंडेशन का विश्लेषण कहता है इनमें से 80% नकारात्मक होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि विचारों के उपद्रव से रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं। इसका उपाय है दिमाग को व्यवस्थित किया जाए और इसमें सकारात्मक विचार भरे जाएं।
1. बदलाव अनुभव करने के लिए काम करें: ज्यादा नहीं, रोजाना सिर्फ 4 मिनट तक खुद के साथ रहें, ध्यान मुद्रा में बैठें। हालांकि बदलाव काे अनुभव करने के लिए आपको काम भी करना होगा। एक बच्चा अपने आप स्कूली होमवर्क कर सकता है, लेकिन जब माता-पिता साथ बैठते हैं, तो बच्चे बहुत बेहतर करते हैं।
2. साेची-समझी प्रतिक्रिया से विचारों की भीड़ घटेगी: जब भी आपको किसी मुद्दे पर चुनौती दी जाए, या किसी चीज पर प्रतिक्रिया की जरूरत हो तो थोड़ा ठहरें और यह तय करें कि आप किस तरह प्रतिक्रिया देना चाहते हैं। साेच-समझकर प्रतिक्रिया देने से दिमाग में विचारों की भीड़ कम होगी। आप सधा हुआ जवाब भी दे सकेंगे।
3. सकारात्मक विचारों से दिमाग में जगह बनेगी: यह रोजमर्रा के काम की सूची बनाने से अलग है। कुछ हफ्तों के लिए रोज 5 मिनट अपने उन विचारों को शब्दों में पिरोने के लिए समय दें, जो दिमाग में ही पड़े रहते हैं। बहुत से लोग इसके साथ शुरू करते हैं, ‘क्या लिखूं? मैं निराश हूं।’ मुद्दा यह है कि वे निराश हैं क्योंकि बाध्य महसूस कर रहे हैं। आप जो करते हैं, उस बारे में विकल्प चुनकर शुरुआत करें। जब आप सही कारण के लिए विकल्प चुनते हैं, तो यह सकारात्मक सोच में बदल जाता है। यह दिमाग में जगह बनती है।
4. उन चीजों को छोड़ना होगा, जो पुरानी हो चुकी हैं: मचान, गैरेज या बगीचे को साफ करने की तरह मुक्त रूप से लिखने से आपको अपने दिमाग को साफ करने में मदद मिलेगी। इसके लिए आपको उन चीजों को छोड़ना होगा, जो पुरानी हो चुकी हैं। अब प्रासंगिक नहीं हैं। मान लें कि किचन में सामग्री सब तरफ बिखरी पड़ी है। आपको इन्हें कैबिनेट में जमाना है। जब आप चीजों को जमाते हुए व्यवस्थित करते हैं तो ऐसा करके आप प्रभावी बनते हैं। दिमाग के विचारों को व्यवस्थित करके भी आप प्रभावी बनते हैं।
आज जिस तनाव और प्रेशर में हमारा समाज जीवन गुज़ार रहा है उसमें फ्यूचर प्लान , शादीशुदा ज़िंदगी , बच्चों की मंहगी पढाई और रोजी रोज़गार बड़ा मुद्दा है। ख़ास कर बात युवाओं की करें तो उनके दिमाग में अपने आने वाले कल को लेकर सबसे ज्यादा ख्याल उमड़ते हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि नकारात्मक विचारों से बचें और सकारात्मक सोच और बेहतर विचार को अपना साथी बनाये।

